डायनासोर का शुरुवाती अस्तित्व
डायनासोर पृथ्वी की सबसे भयंकर प्रजाति, जिसने मेसोजोइक युग के, पृथ्वी पर पिछले 25 करोड़ 20 लाख साल पहले, ट्राईएसिक काल में जन्म लिया था. और 6 करोड़ 60 लाख साल पहले, मेसोजोइक युग के क्रिटेसिअस काल में, इनका भयंकर अस्तिव खत्म हुआ था. डायनासोर शब्द को 1842 में सर रिचर्ड ओवेन ने बनाया था. उन्होंने ग्रीक शब्द से डीनोस लिया जिसका मतलब भयानक होता है. और सौरास शब्द लिया जिसका मतलब शक्तिशाली, चमत्कारिक होता है. लेकिन पृथ्वी पर आज भी, डायनासोरों के वंशज, हम सबके बीच ही रहते हैं. सिर्फ उनका आकार बदल गया है.

डायनासोर के अस्तित्व का समय
करोड़ों साल बाद अम्ल वर्षा का असर खत्म हुआ. पेड़ पौधे फिर से उगने लगे थे. और अब वक्त था डायनासोर का. जिसे हम मेजोज़ोइक युग के नाम जानते है. इसको 3 भागों में बाटा गया है.
· ट्राईएसिक युग
· जुरासिक युग
· क्रिटेसिअस युग
डायनासोर की नयी प्रजातियों की शुरुवात
मेजोज़ोइक युग की शुरुवात, आज से लगभग 25 करोड़ 20 लाख साल पहले हुयी थी. और इनका अंत आज से लगभग 6 करोड़ 60 लाख साल पहले हुआ था. इनका पृथ्वी पर अस्तित्व 18 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा,जिसमे 25 करोड़ 20 लाख साल पहले ट्राईएसिक युग की शुरुवात हुयी. और इस युग को भी 3 भागों में बाटा गया है.
· अर्ली ट्राईएसिक
· लेट ट्राईएसिक
अर्ली ट्राईएसिक जिसकी समय सीमा लगभग 25 करोड़ 20 लाख साल से 24 करोड़ 70 लाख साल तक रही थी. जिसमे ट्राईरेनोसौर्स(Trirenosaurs), ओर्निथोमिमस(Ornithomimus), पेत्रोसौर्स(petrosaurs), लिस्ट्रोसौरस (lystrosaurus), लेबीरिनथोडोंत्स (labyrinthodonts), और
यूपर्केरिया(euparkeria), और टेम्नोस्पोंड्यली(temnospondyli) जैसे माँसाहारी जीवों का विकास हो रहा था.
डायनासोर के अस्तित्व का विकास क्रम
उसके बाद मिडिल ट्राईएसिक युग की शुरुवात हुयी. जिसकी समय सीमा 24 करोड़ 70 लाख सालों से 23 करोड़ 70 लाख सालों तक रही. इस समय पेंजिया द्वीप टूटना शुरू हो गया था. रेंगने वाले जीव आकार में काफी बड़े होने लगे थे. जिससे महासागरों में भी बड़े आकार में भयंकर जीव आ गये थे. जैसे इच्थ्योसौर्स(ichthyosaurs), नोथोसौर्स(nothosaurs), प्रोलीफेरेटेड(proliferated). और जमीनों पर पाइन नामक पेड़ों से जंगल गए थे. जिससे पहली बार मच्छर और कीड़े मकौड़े भी अस्तित्व आ चुके थे. और साथ ही मगरमच्छ अपना आकार बढ़ा रहे थे. और समुद्री जीवों से मुकाबला कर के उनको ही अपना भोजन बनाते थे.
अब लेट ट्राईएसिक युग शुरु हो चुका था. जिसकी शुरुवात 23 करोड़ 70 लाख साल पहले और अंत आज से लगभग 20 करोड़ 10 लाख साल पहले हुआ थी. इस युग में मगरमच्छ और भी भयंकर हो चुके थे. और भीमकाय डायनासोर भी आ चुके थे. साथ ही आसमान में उड़ने वाले पेत्रोसौर्स डायनासोर भी काफी संख्या में बढ़ रहे थे. तभी पृथ्वी ने फिर से ज्वालामुखी का कहर झेला जिसे 80% जीव नहीं झेल पाए और विलुप्त हो चले, प्राचीन मगरमच्छ समुद्र की गहराई में चले जाने से बच गए.डायनासोर की जुरासिक काल की अवधि
जिसके बाद शुरू हुआ जुरासिक युग:- इस युग की शुरुवात पिछले 20 करोड़ 10 लाख साल पहले हुयी थी. और अंत 14 करोड़ 50 लाख साल पहले हुआ था. जुरासिक युग को भी 3 भागों में बाटा गया.
· अर्ली जुरासिक
· मिडिल जुरासिक
· लेट जुरासिक
अर्ली जुरासिक की अवधि पिछले 20 करोड़ 10 लाख साल पहले से 17 करोड़ 40 लाख साल तक थी. इस समय में कई नए समुद्री जीव आ गये थे. और जमीन पर डायनासौर्स, मगरमच्छ और कई दुसरे बड़े जीवों का कब्ज़ा था. जिसमे डिलोफोसौरस(dilophosaurus) सबसे आगे थे. मगरमच्छो का भी विकास जारी था. अब दुनिया के पहले मैमेल्स भी आ गये थे. जो आकार में छोटे चूहे जैसे दिखते थे.
मिडिल जुरासिक की समय अवधि पिछले 17 करोड़ 40 लाख साल से 16 करोड़ 30 लाख साल तक रहा. जिस वक्त डायनासौर्स की 1 हजार से भी ज्यादा प्रजातियाँ पृथ्वी पर आ चुकी थी. इसीवक्त विशाल डायनासौर ब्रचिओसौरस (Brachiosaurus) और डिप्लोडोकस (Diplodocus) दिखते थे जिनके सर पर सींग भी होती थी. दुसरे प्रजाति के बड़े डायनासोर्स अल्लोसौरस (allosaurus) भी आम तौर पर पाए जाते थे. कोनिफर नाम के जंगलों ने दुनिया को हरा भरा कर दिया था. वन्ही समुद्रों में भी प्लेसिओसौरस (plesiosaurs) और इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) नाम के जीवों का राज हो गया था.
लेट जुरासिक का समय पिछले 16 करोड़ 30 लाख साल से 14 करोड़ 50 लाख साल तक रहा था. इस समय में पेंजिया महाद्वीप टूट कर कई भागों में बट रहा था. इसका असर समुद्री जीवो पर पड़ा, जिससे इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) और प्लेसिओसौरस (plesiosaurs) ये बदलाव झेल नहीं पाए. और इनका अस्तित्व खत्म हो गया. उस वक्त के अधिकतर डायनासौर खत्म हो गये थे. पेंजिया के टूटने की वजह से नए तरह का महासागर बना. जिसे आज हम एटलांटिक महासागर कहते हैं.
अब शुरुवात हुयी क्रिटेसिअस युग की
डायनासोर का अंत समय , क्रिटेसिअस युग की शुरुवात
समय के साथ ही नए डायनासौर अस्तित्व में आये. अब क्रिटेसिअस युग की शुरुवात हुयी, जिसकी अवधि पिछले 14 करोड़ 50 लाख साल से 6 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा था. क्रिटेसिअस युग मेजोजोइक युग का सबसे लम्बा युग था. इस युग को दो भागों में बाटा गया है.
· अर्ली क्रिटेसिअस युग
· लेट क्रिटेसिअस युग
अर्ली क्रिटेसिअस युग पिछले 14 करोड़ 50 लाख सालों से पिछले 10 करोड़ सालों तक रहा था. इस समय में कई तरह की प्रजातियों के डायनासौर पृथ्वी पर आये. जैसे कार्चारोदोंतोसौरस(Carcharodontosaurus), स्पाईनोसौरस (Spinosaurus) और समुद्रों में भी मोसासौरस (mosasaurs) पाए जाते थे. ये जीव जो आकार में डायनासौर जितने या उससे भी बड़े होते थे, सभी जीव अंडे देकर अपनी प्रजातियों को आगे बढ़ा रहे थे. आसमान में उड़ने वाले जीव जैसे टेपजारा(Tapejara) और ओर्निथोचीरस (Ornithocheirus) भी आकार में बड़े होने लगे थे. मौसम सभी जीवों के अनुकूल चल रहा था.
शुरुवात हुयी अब लेट क्रिटेसिअस युग की
जो लगभग पिछले 10 करोड़ साल से 6 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा था. उस वक्त पृथ्वी का तापमान लगभग 20 डिग्री
सेल्सियस था. इस वक्त भी डायनासौर अपना विकास कर के अलग अलग प्रजातियों के रूप में जन्म ले रहे थे. जैसे हड्रोसौरस (Hadrosaurs), अन्किलोसौरस (Ankylosaurus), ट्राईसेरोटोप्स (Triceratops) और त्य्रांनोसौरस (Tyrannosaurus). ये ऐसे जीव थे. जो दुसरे जीवों को मारकर अपना भोजन बनाते थे. दूसरी तरफ एपेटोसौर्स, ब्रेकियोसौर्स ऐसे डायनासौर थे जो शाकाहारी थे. ये पेड़ पौधे ही खाते थे. गहरे समुद्र के अन्दर मोसासौरस (mosasaurs) ने इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) को मारकर उनकी जगह ले ली थी. और एल्स्मोसौरस (Elsmosaurus) जिनकी गर्दन जिराफ के जितनी लम्बी होती थी. वो भी समुद्रों में पाए जाने लगे थे. अब धरती पर फूलों वाले पेड़ भी उगने लगे थे. अब क्रिटेसिअस युग का अंत होने का समय आ गया था. धरती की सतह खिसकने लगी थी. और पेंजिया टूटकर अलग अलग महाद्वीपों में बटने लगे थे. जिससे ज्वालामुखी फटना शुरू हो गया था. और लावा के अन्दर मौजूद जहरीली गैसें सभी जीवों के अंत का कारण बन गयीं. ये सब हो ही रहा था. तभी आज से पिछले लगभग 6 करोड़ 60 लाख साल पहले आसमान से 1 (Astroid) गृह जो 70 हजार kmph की रफ़्तार से, पृथ्वी के मैक्सिको देश के पेनेन्सुला सिटी में जा गिरा. जिससे पृथ्वी पर से 75% आबादी का अंत हो गया. सभी डायनासौर का अस्तित्व इस क्रिटेसिअस युग के साथ खत्म हो गया था. बचे हुए 25 % डायनासोर और दुसरे जीव भूंख मिटाने के लिए एक दुसरे को मारकर खाने लगे जिससे . 1-1 करके सारे डायनासोरों का अस्तित्व खत्म हो गया.
क्या डायनासोर का अस्तित्व आज भी है ? तो इसका जवाब हाँ है.
डायनासोर का हिन्दी शब्द भीमसरट होता है. जिसका अर्थ भयानक छिपकली है. कुछ डायनासोर शाकाहारी पेड़ पौधे खाने वाले थे. तो कुछ मांसाहारी थे. कुछ डायनासोर 2 पैरों वाले थे. तो कुछ 4 पैरों वाले थे. डायनासोर अपने अंडे देने के लिए घोंसलों का निर्माण करते थे. और आज पक्षियों के समान अंडे देते थे. आज के पक्षियों को डायनासोर का ही वंशज माना जाता है. वैज्ञानिकों ने अब तक डायनासौर के 500 वंश और 1000 प्रजातियों की खोज की है. आसमान में उड़ने वाली चिड़ियाँ, और दीवाल पर चलने वाली छिपकलियाँ , डायनासोर की 1000 प्रजातियों में से, बचे हुये कुछ वंशज ही हैं. जिन्हें हम और आप बड़ी आसानी से देख पाते हैं. अब वो भयंकर नहीं रहे, क्योंकि अब उनका आकार बेहद छोटा है. जिनके अवशेष पृथ्वी के हर महाद्वीपों में पाए गए है. साल 1970 में मिले डायनासोर के कंकाल दुनिया भर के संग्राहलयों में आकर्षण का केंद्र बन गये है.


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