Saturday, 27 July 2019

पृथ्वी का जन्म, पृथ्वी पर इतना पानी कंहा से आया, पृथ्वी पर जीवन कैसे शुरू हुआ.

पृथ्बी का जन्म 

आज से लगभग पिछले 5 अरब साल पहले, सूर्य के जन्म के कारण हुए धमाके से, सूर्य की ग्रेविटी पॉवर की वजह से, निकला हुआ लावा और मलबा, सूर्य के चारों ओर घूमने लगा, और फिर ये आग का मलबा, आपस में इकठ्ठा हो कर, कई लाख साल तक ग्रेविटी पॉवर से, कई सारे छोटे बड़े गृह  बन गए, जिससे हमारा सौर मंडल बन गया. जिसमें से 1 हमारी पृथ्वी भी थी, उस वक्त पृथ्वी का तापमान 1200 डिग्री सेल्सियस था. धरती आग के बुलबुले जैसे थी. उस वक्त धरती पर सिर्फ उबलती हुयी चट्टानें, कार्बनडाईआक्साइड, नाईट्रोजन, और जलवाष्प थी. पृथ्वी की कोई भी सतह शख्त नहीं थी. साढ़े 4 साल पहले आसमान से 1 मंगल गृह के आकार का दूसरा गृह 1 लाख 80 हजार kmph की रफ्तार से पृथ्वी में जा टकराया, और पृथ्वी में पूरी तरह समाहित हो गया. जिससे बहुत बड़ा धमाका हुआ, इस धमाके से कई खरब टन मलबा, पृथ्वी से बाहर की ओर निकल गया, और पृथ्वी की ग्रैविटी पॉवर की वजह से, पृथ्वी का चक्कर लगाने लगे. और आपस में जुडकर 1 गेंद बन गयी, जिसे आज हम चाँद कहते हैं. चाँद उस वक्त पृथ्वी से मात्र 22000 km दूर था. जिससे चाँद की ग्रैविटी पॉवर पृथ्वी पर लगने से पृथ्वी के अन्दर का लावा ज्वालामुखी बन कर निकलने लगा. यह सिलसिला लाखों सालों तक चलता रहा. 



पृथ्वी पर इतना पानी कंहा से आया

लगभग 3 अरब 900 करोड़ साल पहले, आसमान में बची हुयी चट्टाने, उल्का पिंड धरती पर बरसना शुरू हो गए, जो लगातार दो अरब सालों तक पृथ्वी पर बरसे, पृथ्वी पर गिरने वाली उल्का पिंडों के अन्दर चमकदार क्रिस्टल थे, जिसे आज हम नमक कहते है. जो पृथ्वी पर गिरने के बाद पानी बन गए. आज हम जिन महासागरों के पानी से नमक बनाते है, ये पानी के महासागर भी, इन उल्का पिंडों के अन्दर मौजूद, नमक से ही बना है. इसीलिए सारे समुद्र का पानी नमकीन होता है. आज पृथ्वी में जो पानी है, वह कई अरबो साल पुराना है.
धरती पर ज्यादा पानी इकठ्ठा होने के कारण, पृथ्वी की उपरी सतह ठंडी और शक्त बन गयी. लेकिन धरती के अन्दर लावा अपना भयंकर रूप लिए मौजूद था . पृथ्वी का ऊपरी तापमान उस वक्त 80 डिग्री सेल्सियस हो चुका था.  तब चाँद पृथ्वी के बेहद करीब होने की वजह से, चाँद से निकलने वाली ग्रैविटी पॉवर ने, पृथ्वी पर तूफान मचा दिया, जिसने पूरी पृथ्वी पर उथल पुथल कर दिया. यह सिलसिला लाखों सालों तक चलता रहा. समय के साथ चाँद पृथ्वी से दूर चला गया. जिससे तूफान, पानी की लहरें शांत हो गयी.  अब पृथ्वी के अन्दर का लावा, फिर से ज्वालामुखी बनकर बाहर निकलने लगा. और छोटे छोटे द्वीप बनाने लगे. दूसरी तरफ उल्का पिंडों की आकाश से बारिश, अभी बंद नहीं हुयी थी.


पृथ्वी पर जीवन कैसे शुरू हुआ

लगभग 3.8 अरब साल पहले, आकाश से पृथ्वी पर गिरने वाली, उल्का पिंडों के अन्दर, पानी और नमक के अलावा और भी कुछ था, जिसमे जीवन पैदा करने वाले  तत्व मौजूद थे. इसके अन्दर कार्बन और एमिनो एसिड थे. जो पृथ्वी के हर जीवधारियों और पेड़- पौधों में मौजूद होते हैं. ये उल्का समुद्र के पानी में, 3 हजार किलोमीटर नीचे चले जाते थे. जंहा पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुचती थी, जिससे उल्का पिंड ठंडे होकर जमने लगे. लेकिन इनके अन्दर गर्म लावा मौजूद था. इन्होने एक चिमनी का आकार बनाना शुरू कर दिया, और फिर इन चिमनियों के अन्दर पानी जाने से एक केमिकल रिएक्शन हुआ, जिससे शूक्ष्म जीवों का जन्म हुआ. और धीरे धीरे पूरे समुद्र के अन्दर सिंगल सेल बैक्टीरिया पैदा हो गये.  जो दिखने में पत्तों की तरह लगते थे. जिन्हें स्ट्रोमेटोलाइट भी कहा जाता है.

पृथ्वी पर इतनी ऑक्सिजन कंहा से आई

जिन उल्का पिंडों के अन्दर से, नमक पिघल कर पानी बना, वही पानी इकठ्ठा होकर समुद्र बना. आकाश से पृथ्वी पर गिरने वाली उल्का पिंडों के अन्दर, पानी और नमक के अलावा और कुछ भी था, जिसमे जीवन पैदा करने वाले तत्व मौजूद थे. इन तत्वों के समुद्र के पानी के साथ मिलने से, अब समुद्र के अन्दर चट्टानों की ऊपरी सतह पर, पत्तों की तरह दिखने वाले जीवित बैक्टीरिया पैदा होने लगे थे. और इन्होने पूरे समुद्र में कब्ज़ा कर लिया था. ये बैक्टीरिया सूर्य की रोशनी से अपना भोजन बनाते थे. इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं. जिसमे यह सूर्य की किरणों की ताकत से, कार्बन डाई आक्साइड और पानी को ग्लूकोस में बदल देता है. और काफी मात्रा में ऑक्सिजन छोड़ता है. जिससे समय के साथ सारे समुद्र ऑक्सिजन से भर गये. ऑक्सिजन के कारण पानी में मौजूद लोहे को जंग लगने लगी, जिससे लोहे के अस्तित्व का पता चला. लगभग 2 अरब सालों तक ऑक्सिजन पूरी पृथ्वी और आकाश में फैलती रही.
पृथ्वी का घूमने का समय भी कम होने लगा था. लगभग आज से 1.5 अरब साल पहले 1 दिन सिर्फ 16 घंटे के होने लगे थे. इसके कुछ लाखों साल बाद, महासागरों के नीचे दबे लावों ने, पृथ्वी की ऊपरी सतह को गतिमान कर दिया, जिसने धरती की सभी परतों को आपस में जोड़कर, 1 बहुत ही विशाल द्वीप बना दिया. जिसका नाम था रोडिनिया. दिन बढ़ कर 18 घंटे के होने लगे थे. उसके बाद पृथ्वी के गर्भ से एक ऐसी शक्ति ऊपर की ओर निकली, जिसने धरती को 2 बड़े टुकड़ों में बाँट दिया. यह शक्ति थी ताप , जो धरती के अन्दर पिघले हुए लावों से बनी थी. जिसने धरती की ऊपरी सतह को कमजोर कर के, दोनों सतह को एक दुसरे से काफी दूर कर दिया.
जिससे 2 महाद्वीप बनें. लारेशिया और गोंडवाना.

पृथ्वी पर बर्फ कैसे बनी :-

धरती पर ज्वालामुखी फटने का सिलसिला लगातार जारी था. ज्वालामुखी से निकले हुए लावा के साथ कार्बनडाईआक्साईड , और अन्य कई हानिकारक गैसें वातावरण में फैलने लगी. जिसने सूर्य से आने वाली किरणों को, सोखना शुरू कर दिया. जिससे धरती का तापमान बढ़ने लगा. इस बढ़ते तापमान के कारण, समुद्र के जल से बने बादल, और कार्बनडाईआक्साईड आपस में मिलकर, पृथ्वी पर अम्ल बारिश(Acid Rain) करने लगे. बारिश के साथ आने वाली कार्बनडाईआक्साईड को, चट्टानों और पत्थरों ने सोख लिया. वातावरण में कार्बनडाईआक्साईड खत्म हो जाने से, कुछ हजार सालों में धरती का ऊपरी तापमान, घट कर -50 डिग्री सेल्सियस हो गया. जिससे पृथ्वी बर्फ की गेंद जैसी बन गयी. धरती पर चारों तरफ बर्फ हो जाने से, सूर्य की किरणे पृथ्वी से रिफ्लेक्ट हो जाती थी. जिससे तापमान बढ़ नहीं पाता, और बर्फ जमती चली जा रही थी. लेकिन धरती के अन्दर लावा अभी भी जल रहा था, जिससे ज्वालामुखी तैयार हो रहे थे. और फट भी रहे थे. लेकिन बर्फ इतनी ज्यादा हो गयी थी. की ज्वालामुखी से निकलने वाले लावे भी, बर्फ को पिघला नहीं पा रहे थे. तब लावों से कार्बनडाईआक्साईड निकल कर इकठ्ठा होने लगा , और सूर्य से मिलने वाली गर्मी को सोख कर, बर्फ को पिघलाने लगा. अब तक एक दिन 22 घंटो के होने लगे थे.

पृथ्वी पर ओजोन की परत कैसे बनी:-

बर्फ पिघलते समय, सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों से, एक केमिकल रिएक्शन हुआ, जिससे पानी में हाइड्रोजन पराआक्साइड बनी. उसके टूटने से ऑक्सीजन बनी. यही ऑक्सीजन गैस आकाश में 50 किलोमीटर ऊपर वातावरण में पहुची. तो वंहा भी एक केमिकल रिएक्शन हुआ. जिससे ओजोन गैस बनी . जो सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों को, पृथ्वी पर आने से रोकने लगी. लगभग 15 करोड़ सालों तक ओजोन गैस की परत काफी मोटी हो गयी. जिससे पेड़ पौधे अस्तित्व में आये. और पृथ्वी पर ऑक्सीजन की मात्रा और ज्यादा बढ़ने लगी. इसके साथ पृथ्वी पर ज्यादा ऑक्सीजन होने से, समुद्री छोटे जीव जन्तुओं का विकास बहुत तेजी से होने लगा था. समुद्री जीव, बाहर निकल कर रेंगने लगे थे. और इनकी हड्डियाँ, मांसपेशियां बड़ी तेजी से बढ़ने लगी थी. जिससे कई तरह की अलग अलग प्रजातियों के जीव जन्तु पृथ्वी पर हो चुके थे.
 तभी आज से लगभग 2 सौ करोड़ साल पहले लारेशिया के मैदानों में अचानक ज्वालामुखी फटने लगे. और चारों तरफ लावा फैलने लगा. जिससे यंहा के सभी जीवों का अंत हो गया. जबकि गोंडवाना महाद्वीप में जैसे कुछ हुआ ही न हो. वंहा का तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस था. तभी वंहा पर आसमान से जलती हुयी राख गिरना शुरू हो गयी. जो की 16000 किलोमीटर दूर फट रहे ज्वालामुखी से निकली थी. उस ज्वालामुखी से सल्फर डाईऑक्साईड निकली, और वातावरण में मिलकर सल्फयूरिक एसिड बन गयी. जिसने वंहा भी सब कुछ जलाकर राख कर दिया. महासागर के पानी में मीथेन गैस के बुलबुले निकलने लगे थे. समुद्र और जमीन में कुछ था तो जला हुआ मलबा. पृथ्वी के 95% जीव जन्तु, पेड़ पौधे खत्म हो गये थे. लगभग 27 करोड़ साल पहले ज्वालामुखी के फटने से निकले लावा ने, दोनों महाद्वीपों को आपस में जोड़ दिया था. और 1 नया महाद्वीप बना दिया. जिसका नाम पेंजिया कहा गया.
जिसके बाद पृथ्वी डायनासौर , बड़े सांपो की प्रजातियाँ और बाद में हम इंसानों की अस्तित्व पृथ्वी पर आया.

No comments:

Post a Comment