पृथ्वी पर साँपों की प्रजाति कब से है?
लगभग आज 6 करोड़ साल पहले , जब पृथ्वी से डायनासोर का अस्तित्व खत्म हुआ था. अब पृथ्वी पर ज्वालामुखी के लावे शांत होने जाने के बाद, गर्म मौसम में अब धरती पर रेंगने वाले जीवों को मौका मिला था , खुद का विकास करने का. पृथ्वी पर ज्यादा तापमान और ज्यादा ऑक्सीजन होने से, इन जीवों की हड्डियाँ और मांसपेशियाँ बहुत तेजी से बढ़ने लगे थे, उसके बाद वो प्रजाति आई जिन्हें आज हम सांप कहते हैं. इस समय पृथ्वी का तापमान लगभग 80 डिग्री सेल्सियस रहा था. इतनी गर्मी में भी साँपों की प्रजातियाँ मज़े से जी रही थी. क्योंकि साँपों की खाल प्लास्टिक नुमा होती है , जो इन्हें ठंडी और गर्मी से बचाती है. और सभी तरह के मौसम में रहने लायक बना देती है. बेहद गर्म मौसम होने के कारण ये सांप आकार में बहुत बड़े हो रहे थे. साल 2009 में कोलंबिया के सेर्रेजॉन गाँव में 1 कोयले की खान के अन्दर से, 1 बहुत ही बड़े आकार में हड्डियों का ढांचा मिला. जिसकी वैज्ञानिक जांच होने के बाद पता चला. की यह हड्डियों का ढांचा किसी डायनासोर का नहीं है. बल्कि ये हड्डियों का ढाचा 1 बहुत बड़े सांप का है. जिसको नाम दिया गया टाईटेनोबोआ. साँपों की यह प्रजाति आकार में सबसे बड़े और भयंकर होते थे. इसकी लम्बाई लगभग 50 फिट, चौड़ाई 4 फिट, और वजन में ये 1500 kg से भी ज्यादा अनुमानित किया गया है.
सांप का 6 करोड़ साल पुराना हड्डियों का ढांचा
साँपों के वैज्ञानिक (हार्पिटोलौजिस्ट) द्वारा हड्डियों की जांच से पता चला की ये लगभग 6 करोड़ साल पुरानी है जिससे अब तो हमें इनके अस्तित्व होने के पक्के सबूत भी मिल गये है. इस प्रजाति के अन्दर जहर बिलकुल भी नहीं होता था. लेकिन इनके भयंकर आकार और भरपूर ताकत होने से कोई भी जीव इनसे बच नहीं पाता था, ये गहरे हरे और काले रंग के होते थे. इनके शरीर में कोई भी धारियां नहीं होती थी. बोयरिथिरियम और पैरिथिरियम नाम के जीव, इनके प्रीय भोजन होते थे. जो हाथी के पूर्वज माने जाते हैं. टाईटेनोबोआ के कंकाल मिलने से पहले तक, धरती के सबसे बड़े सांपो में जाईजैन्टोफिस को माना जाता था. जिसकी लम्बाई 33 फिट , चौड़ाई 2 फिट , वजन में ये 500 kg से ज्यादा होते थे. इनमे भी जहर नहीं होता लेकिन , इसके पास से कोई बच कर नहीं जा सकता था. इन सांपो का अस्तित्व पिछले 6 करोड़ सालों से लगभग 4 करोड़ 80 लाख साल पहले तक रहा था. पृथ्वी का तापमान ठंडा होने के कारण इनका आकार छोटा होने लगा . जिससे सांपो की यह प्रजाति लुप्त हो कर छोटे कई अन्य प्रजातियों के साँपों में बदल गये. और आज भी हमारी धरती के गर्म स्थानों पर, बड़े आकार के सांप पाए जाते हैं. और अब तो वो बेहद जहरीले भी होते हैं.
साँपों का इंसानी जीवन में अहम योगदान
इंसानी प्रजाति के विकसित होने में साँपों का सबसे बड़ा योगदान रहा है. ये सांप हमारे पूर्वज मैमेल्स का शिकार कर के खा जाते थे. जिनसे बचने के लिए हम मैमेल्स पेड़ों पर चढ़ने लगे थे. और साँपों से दूर रहने के लिए, उन पर अपनी पैनी नज़र रखने लगे थे. जिससे मैमेल्स का 45 % विकास बड़ी तेजी से हुआ. आज हमारी आँखों में तेज रोशनी है जो कैमरे के 576 मेगाफिक्सेल से भी ज्यादा है , ये सब साँपों की वजह से ही है. इसीलिए आज भी हम साँपों को देखते ही बेहद डर जाते हैं, जबकि ऐसा दुसरे किसी जीवों को देखकर नहीं लगता. अगर पृथ्वी पर सांप नहीं होते तो शायद हमारी नज़र इतनी तेज नहीं होती.
आज पृथ्वी पर साँपों की कुल प्रजातियाँ कितनी है
आज पृथ्वी पर साँपों की कुल प्रजातियाँ 2500 से भी ज्यादा है, जिनमे से 25% सांपो की जहरीली प्रजाति है. जो अपने अलग अलग आकार लिए धरती के हर कोने में मौजूद हैं. लेकिन ठंडे देशों में सांप नहीं पाए जाते है. या हम इनको गर्म वातारण वाले जीव कह सकते हैं. इनकी उम्र साँपों की प्रजातियों के हिसाब से अलग 2 होती है. छोटे साँपों की उम्र 10 से 15 साल . और सबसे बड़े साँपों की उम्र 60 से 70 साल होती है. कुल साँपों की प्रजातियों में से 70% सांप ही अंडे देते है. बल्कि 30% साँपों की प्रजातियाँ आपस में प्रजनन करके बच्चे पैदा करते हैं.आज पृथ्वी पर सबसे बड़े सांप
आज के समय में सबसे बड़े साँपों की प्रजाति जिसका नाम पाइथन रेटिकुलेटस है. जिसकी लम्बाई 30 फिट से भी ज्यादा होती है. सांप अपने मुँह के निचले जबड़े को जमीन में रखकर ,आने वाले भूकंप की तरंगे महसूस कर सकता है. और इससे दूर जा कर बच सकता है. सांप कभी किसी मनुष्य को खुद से नुकशान नहीं पहुँचाता, बल्कि दुसरे द्वारा छेड़े जाने पर ही अपना पीछा छुड़ाने के लिए काट लेते हैं. साँपों के पैर नहीं होते. बल्कि सांप अपने निचले भाग के मांस पेशियों की मदद से चलते हैं .
साँपों के बारे में कुछ रोचक जानकारियां
सांप नाक से नहीं सूंघते है बल्कि ये अपनी जीभ निकाल कर वातारण का एहसास करते हैं. साँपों की प्रजाति के पास कान भी नहीं होते है . ये लोगों की गलत फहमी है की बीन की आवाज सुनकर सांप आते हैं. इनकी आँखों में पलकें भी नहीं होती हैं, जिससे हमेशा इनकी आँखे खुली होती है. इनके मुँह में जहर की 1 थैली होती है जिनसे जुड़े होते है इनके दोनों पैने और खोखले दांत. जिनसे जहर निकल कर दुसरे के पास पहुचता है. धरती पर लगभग 525 प्रजातियों के जहरीले सांप रहते हैं. जिसमे सबसे ज्यादा जहरीले सांप जैसे -किंग कोबरा इसके 1 बार के काटने में हाथी को मारने जितना जहर निकलता है. यह अपना फन 4 फिट ऊपर तक उठा सकता है. , ब्लैक माम्बा 1 बार में 12 बार काट लेता है., रैटलस्नेक, डेथ एडर सबसे तेज हमला करने वाला सांप ,सॉ स्केल्डवाईपर , होर्न्ड वाईपर सिंग वाले सांप, फिलिपिनी कोबरा, टाइगर स्नेक , ब्लू करैत , आदि पाए जाते हैं.
सांपों की प्रजातीयां शीतरक्त की होती है. मतलब ठंडी होती है. इनके शरीर का तापमान मौसम के अनुसार बदलता रहता है. सांपों के शरीर का तापमान भोजन के बिना ही घटता बढ़ता रहता है. इसलिए कम भोजन मिलने पर भी साँपों की प्रजातियाँ लम्बे समय तक जीवित रहते हैं . कुछ सांप महीने में एक बार भोजन करते हैं. जबकि कुछ बड़े साँपों की प्रजाति, साल में 1 या 2 बार ढेर सारा खाना खाकर जीवित रहते हैं.
सांप खाते समय चबा नहीं पाते. बल्कि पूरा निगल जाते हैं जिससे इन्हें खाया हुआ पचाने में काफी समय लगता है. और साँपों के अन्दर जहर बनने की यही वजह होती है . अधिकतर सांपो के जबड़े , उनके मुँह से दुगने आकार में बड़े होते है.सांप अपना मुँह 150 डिग्री से भी ज्यादा खोल सकता है. जिससे सांप बड़े जीवों को भी निगल जाता है. आज विश्व में सबसे लम्बे साँपों की प्रजाति में (जालीदार अजगर) रैटीकुलस पेथोंन का नाम दर्ज है. जो 30 फिट से ज्यादा लम्बा होता है. इसका वजन 120 kg से भी ज्यादा होता है. यह दक्षिण पूर्वी एशिया और फिलिपिन्स में पाए जाते हैं.
पृथ्वी के सबसे छोटे और अनोखे सांप

विश्व के सबसे छोटे साँप थ्रेड स्नेक है, जो कैरिबियन सागर के महाद्वीपों में पाए जाते हैं इनका आकार सिर्फ 10 से 12 सेंटीमीटर ही होता है. साँपों की कुछ प्रजातियाँ हवा में उड़ सकती है मतलब एक पेड़ से दुसरे पेड़ तक , 50 से 100 फिट की उड़ान भर सकते हैं.
समुद्र के अन्दर रहने वाले सापों की कुछ प्रजातीयां बेहद जहरीली होती हैं. जिनका 1 बूँद जहर लगभग 200 इंसानों को खत्म कर दे. साँपों की प्रजाति भी डायनासोर के समय में रहने वाले कुछ प्रजातियों में से ही 1 है. सांप 1 साल में लगभग 3 बार अपनी पूरी चमड़ी निकाल देते हैं. सांप कुछ पीता नहीं है , बल्कि साँपों की जरुरत का पानी शिकार से मिल जाता है. लेकिन अगर सांप को भूखा रख कर कुछ पिलाया जाये तो सांप पि तो लेगा लेकिन उसे बाद में तकलीफ होती है. क्योंकि सांप दूध और पानी पचा नहीं पता है. इसलिए साँपों को कभी दूध नहीं पिलाना चाहिए.

























