Monday, 12 August 2019

पृथ्वी पर भयंकर साँपों का अस्तित्व

पृथ्वी पर साँपों की प्रजाति कब से है?

लगभग आज 6 करोड़ साल पहले , जब पृथ्वी से डायनासोर का अस्तित्व खत्म हुआ था. अब पृथ्वी पर ज्वालामुखी के लावे शांत होने जाने के बाद, गर्म मौसम में अब धरती पर रेंगने वाले जीवों को मौका मिला था , खुद का विकास करने का. पृथ्वी पर ज्यादा तापमान और ज्यादा ऑक्सीजन होने से, इन  जीवों की हड्डियाँ और मांसपेशियाँ बहुत तेजी से बढ़ने लगे थे, उसके बाद वो प्रजाति आई जिन्हें आज हम सांप कहते हैं. इस समय पृथ्वी का तापमान लगभग 80 डिग्री सेल्सियस रहा था. इतनी गर्मी में भी साँपों की प्रजातियाँ मज़े से जी रही थी. क्योंकि साँपों की खाल प्लास्टिक नुमा होती है , जो इन्हें ठंडी और गर्मी से बचाती है. और सभी तरह के मौसम में रहने लायक बना देती है. बेहद गर्म मौसम होने के कारण ये सांप आकार में बहुत बड़े हो रहे थे.  साल 2009 में कोलंबिया के सेर्रेजॉन गाँव में 1 कोयले की खान के अन्दर से, 1 बहुत ही बड़े आकार में हड्डियों का ढांचा मिला. जिसकी वैज्ञानिक जांच होने के बाद पता चला. की यह हड्डियों का ढांचा किसी डायनासोर का नहीं है. बल्कि ये हड्डियों का ढाचा 1 बहुत बड़े सांप का है. जिसको नाम दिया गया टाईटेनोबोआ. साँपों की यह प्रजाति आकार में सबसे बड़े और भयंकर होते थे.  इसकी लम्बाई लगभग 50 फिट, चौड़ाई 4 फिट, और वजन में ये 1500 kg से भी ज्यादा अनुमानित किया गया है.

सांप का 6 करोड़ साल पुराना हड्डियों का ढांचा




साँपों के वैज्ञानिक (हार्पिटोलौजिस्ट) द्वारा हड्डियों की जांच से पता चला की ये लगभग 6 करोड़ साल पुरानी है जिससे अब तो हमें इनके अस्तित्व होने के पक्के सबूत भी मिल गये है. इस प्रजाति के अन्दर जहर बिलकुल भी नहीं होता था. लेकिन इनके भयंकर आकार और भरपूर ताकत होने से कोई भी जीव इनसे बच नहीं पाता था, ये गहरे हरे और काले रंग के होते थे. इनके शरीर में कोई भी धारियां नहीं होती थी. बोयरिथिरियम और पैरिथिरियम नाम के जीव, इनके प्रीय भोजन होते थे.  जो हाथी के पूर्वज माने जाते हैं.  टाईटेनोबोआ के कंकाल मिलने से पहले तक, धरती के सबसे बड़े सांपो में जाईजैन्टोफिस को माना जाता था. जिसकी लम्बाई 33 फिट , चौड़ाई 2 फिट , वजन में ये 500 kg से ज्यादा होते थे. इनमे भी जहर नहीं होता लेकिन , इसके पास से कोई बच कर नहीं जा सकता था.  इन सांपो का अस्तित्व पिछले 6 करोड़ सालों से लगभग 4 करोड़ 80 लाख साल पहले तक रहा था. पृथ्वी का तापमान ठंडा होने के कारण इनका आकार छोटा होने लगा . जिससे सांपो की यह प्रजाति लुप्त हो कर छोटे कई अन्य प्रजातियों के साँपों में बदल गये. और आज भी हमारी धरती के गर्म स्थानों पर, बड़े आकार के सांप पाए जाते हैं. और अब तो वो बेहद जहरीले भी होते हैं.  

साँपों का इंसानी जीवन में अहम योगदान


इंसानी प्रजाति के विकसित होने में साँपों का सबसे बड़ा योगदान रहा है. ये सांप हमारे पूर्वज मैमेल्स का शिकार कर के खा जाते थे. जिनसे बचने के लिए हम मैमेल्स पेड़ों पर चढ़ने लगे थे. और साँपों से दूर रहने के लिए, उन पर अपनी पैनी नज़र रखने लगे थे. जिससे मैमेल्स का 45 % विकास बड़ी तेजी से हुआ. आज हमारी आँखों में तेज रोशनी है जो कैमरे के 576 मेगाफिक्सेल से भी ज्यादा है , ये सब साँपों की वजह से ही है. इसीलिए आज भी हम साँपों को देखते ही बेहद डर जाते हैं, जबकि ऐसा दुसरे किसी जीवों को देखकर नहीं लगता. अगर पृथ्वी पर सांप नहीं होते तो शायद हमारी नज़र इतनी तेज नहीं होती.

आज पृथ्वी पर साँपों की कुल प्रजातियाँ कितनी है

 आज पृथ्वी पर साँपों की कुल प्रजातियाँ 2500 से भी ज्यादा है,  जिनमे से 25% सांपो की जहरीली प्रजाति है. जो अपने अलग अलग आकार लिए धरती के हर कोने में मौजूद हैं. लेकिन ठंडे देशों में सांप नहीं पाए जाते है. या हम इनको गर्म वातारण वाले जीव कह सकते हैं.  इनकी उम्र साँपों की प्रजातियों के हिसाब से अलग 2 होती है. छोटे साँपों की उम्र 10 से 15 साल . और सबसे बड़े साँपों की उम्र 60 से 70 साल होती है. कुल साँपों की प्रजातियों में से 70% सांप ही अंडे देते है. बल्कि 30%  साँपों की प्रजातियाँ आपस में प्रजनन करके  बच्चे पैदा करते हैं. 

आज पृथ्वी पर सबसे बड़े सांप

आज के समय में सबसे बड़े साँपों की प्रजाति जिसका नाम पाइथन रेटिकुलेटस है. जिसकी लम्बाई 30 फिट से भी ज्यादा होती है. सांप अपने मुँह के निचले जबड़े को जमीन में रखकर ,आने वाले भूकंप की तरंगे महसूस कर सकता है. और इससे दूर जा कर बच सकता है. सांप कभी किसी मनुष्य को खुद से नुकशान नहीं पहुँचाता, बल्कि दुसरे द्वारा छेड़े जाने पर ही अपना पीछा छुड़ाने के लिए काट लेते हैं. साँपों के पैर नहीं होते. बल्कि सांप अपने निचले भाग के मांस पेशियों की मदद से चलते हैं .

साँपों के बारे में कुछ रोचक जानकारियां



सांप नाक से  नहीं सूंघते है बल्कि ये अपनी जीभ निकाल कर वातारण का एहसास करते हैं. साँपों की प्रजाति के पास कान भी नहीं होते है . ये लोगों की गलत फहमी है की बीन की आवाज सुनकर सांप आते हैं. इनकी आँखों में पलकें भी नहीं होती हैं, जिससे हमेशा इनकी आँखे खुली होती है. इनके मुँह में जहर की 1 थैली होती है जिनसे जुड़े होते है इनके दोनों पैने और खोखले दांत. जिनसे जहर निकल कर दुसरे के पास पहुचता है. धरती पर लगभग 525 प्रजातियों के जहरीले सांप रहते हैं. जिसमे सबसे ज्यादा जहरीले सांप जैसे -किंग कोबरा इसके 1 बार के काटने में हाथी को मारने जितना जहर निकलता है. यह अपना फन 4 फिट ऊपर तक उठा सकता है. , ब्लैक माम्बा 1 बार में 12 बार काट लेता है., रैटलस्नेक, डेथ एडर सबसे तेज हमला करने वाला सांप ,सॉ स्केल्डवाईपर , होर्न्ड वाईपर सिंग वाले सांप,  फिलिपिनी कोबरा, टाइगर स्नेक , ब्लू करैत , आदि पाए जाते हैं.  
सांपों की प्रजातीयां शीतरक्त की होती है. मतलब ठंडी होती है. इनके शरीर का तापमान मौसम के अनुसार बदलता रहता है.   सांपों के शरीर का तापमान भोजन के बिना ही घटता बढ़ता रहता है. इसलिए कम भोजन मिलने पर भी साँपों की प्रजातियाँ लम्बे समय तक जीवित रहते हैं . कुछ सांप महीने में एक बार भोजन करते हैं. जबकि कुछ बड़े साँपों की प्रजाति, साल में 1 या 2 बार ढेर सारा खाना खाकर जीवित रहते हैं. 

सांप खाते समय चबा नहीं पाते. बल्कि पूरा निगल जाते हैं जिससे इन्हें खाया हुआ पचाने में काफी समय लगता है. और साँपों के अन्दर जहर बनने की यही वजह होती है . अधिकतर सांपो के जबड़े , उनके मुँह से दुगने आकार में बड़े होते है.


सांप अपना मुँह 150 डिग्री से भी ज्यादा खोल सकता है. जिससे सांप बड़े जीवों को भी निगल जाता है. आज विश्व में सबसे लम्बे साँपों की प्रजाति में (जालीदार अजगर) रैटीकुलस पेथोंन का नाम दर्ज है. जो 30 फिट से ज्यादा लम्बा होता है. इसका वजन 120 kg से भी ज्यादा होता है. यह दक्षिण पूर्वी एशिया और फिलिपिन्स में पाए जाते हैं.



पृथ्वी के सबसे छोटे और अनोखे सांप




 विश्व के सबसे छोटे साँप थ्रेड स्नेक है, जो कैरिबियन सागर के महाद्वीपों में पाए जाते हैं इनका आकार सिर्फ 10 से 12 सेंटीमीटर ही होता है.  साँपों की कुछ प्रजातियाँ हवा में उड़ सकती है मतलब एक पेड़ से दुसरे पेड़ तक ,  50 से 100 फिट की उड़ान भर सकते हैं.
  
 समुद्र के अन्दर रहने वाले सापों की कुछ प्रजातीयां बेहद जहरीली होती हैं. जिनका 1 बूँद जहर लगभग 200 इंसानों को खत्म कर दे. साँपों की प्रजाति भी डायनासोर के समय में रहने वाले कुछ प्रजातियों में से ही 1 है.  सांप 1 साल में लगभग 3 बार अपनी पूरी चमड़ी निकाल देते हैं. सांप कुछ पीता नहीं है , बल्कि साँपों की जरुरत का पानी शिकार से मिल जाता है. लेकिन अगर सांप को भूखा रख कर कुछ पिलाया जाये तो सांप पि तो लेगा लेकिन उसे बाद में तकलीफ होती है. क्योंकि सांप दूध और पानी पचा नहीं पता है. इसलिए साँपों को कभी दूध नहीं पिलाना चाहिए. 

डायनासोर की प्रजातियों की उत्त्पति और अंत


डायनासोर का शुरुवाती अस्तित्व


डायनासोर पृथ्वी की सबसे भयंकर प्रजाति, जिसने मेसोजोइक युग के, पृथ्वी पर पिछले 25 करोड़ 20 लाख साल पहले, ट्राईएसिक काल में जन्म लिया था. और 6 करोड़ 60 लाख साल पहले, मेसोजोइक युग के क्रिटेसिअस काल में, इनका भयंकर अस्तिव खत्म हुआ था. डायनासोर शब्द को 1842 में सर रिचर्ड ओवेन ने बनाया था. उन्होंने ग्रीक शब्द से डीनोस लिया जिसका मतलब भयानक होता है. और सौरास शब्द लिया जिसका मतलब शक्तिशाली, चमत्कारिक होता है. लेकिन पृथ्वी पर आज भी, डायनासोरों के वंशज, हम सबके बीच ही रहते हैं. सिर्फ उनका आकार बदल गया है.


डायनासोर के अस्तित्व का समय

करोड़ों साल बाद अम्ल वर्षा का असर खत्म हुआ. पेड़ पौधे फिर से उगने लगे थे. और अब वक्त था डायनासोर का. जिसे हम मेजोज़ोइक युग के नाम जानते है. इसको 3 भागों में बाटा गया है.

                                                                                 · ट्राईएसिक युग
· जुरासिक युग
· क्रिटेसिअस युग



डायनासोर की नयी प्रजातियों की शुरुवात

मेजोज़ोइक युग की शुरुवात, आज से लगभग 25 करोड़ 20 लाख साल पहले हुयी थी. और इनका अंत आज से लगभग 6 करोड़ 60 लाख साल पहले हुआ था. इनका पृथ्वी पर अस्तित्व 18 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा,जिसमे 25 करोड़ 20 लाख साल पहले ट्राईएसिक युग की शुरुवात हुयी. और इस युग को भी 3 भागों में बाटा गया है.
                                                                                    · अर्ली ट्राईएसिक
· मिडिल ट्राईएसिक
· लेट ट्राईएसिक
अर्ली ट्राईएसिक जिसकी समय सीमा लगभग 25 करोड़ 20 लाख साल से 24 करोड़ 70 लाख साल तक रही थी. जिसमे ट्राईरेनोसौर्स(Trirenosaurs), ओर्निथोमिमस(Ornithomimus), पेत्रोसौर्स(petrosaurs), लिस्ट्रोसौरस (lystrosaurus), लेबीरिनथोडोंत्स (labyrinthodonts), और
यूपर्केरिया(euparkeria), और टेम्नोस्पोंड्यली(temnospondyli) जैसे माँसाहारी जीवों का विकास हो रहा था.

डायनासोर के अस्तित्व का विकास क्रम

उसके बाद मिडिल ट्राईएसिक युग की शुरुवात हुयी. जिसकी समय सीमा 24 करोड़ 70 लाख सालों से 23 करोड़ 70 लाख सालों तक रही. इस समय पेंजिया द्वीप टूटना शुरू हो गया था. रेंगने वाले जीव आकार में काफी बड़े होने लगे थे. जिससे महासागरों में भी बड़े आकार में भयंकर जीव आ गये थे. जैसे इच्थ्योसौर्स(ichthyosaurs), नोथोसौर्स(nothosaurs), प्रोलीफेरेटेड(proliferated). और जमीनों पर पाइन नामक पेड़ों से जंगल गए थे. जिससे पहली बार मच्छर और कीड़े मकौड़े भी अस्तित्व आ चुके थे. और साथ ही मगरमच्छ अपना आकार बढ़ा रहे थे. और समुद्री जीवों से मुकाबला कर के उनको ही अपना भोजन बनाते थे.
अब लेट ट्राईएसिक युग शुरु हो चुका था. जिसकी शुरुवात 23 करोड़ 70 लाख साल पहले और अंत आज से लगभग 20 करोड़ 10 लाख साल पहले हुआ थी. इस युग में मगरमच्छ और भी भयंकर हो चुके थे. और भीमकाय डायनासोर भी आ चुके थे. साथ ही आसमान में उड़ने वाले पेत्रोसौर्स डायनासोर भी काफी संख्या में बढ़ रहे थे. तभी पृथ्वी ने फिर से ज्वालामुखी का कहर झेला जिसे 80% जीव नहीं झेल पाए और विलुप्त हो चले, प्राचीन मगरमच्छ समुद्र की गहराई में चले जाने से बच गए.

डायनासोर की जुरासिक काल की अवधि

जिसके बाद शुरू हुआ जुरासिक युग:- इस युग की शुरुवात पिछले 20 करोड़ 10 लाख साल पहले हुयी थी. और अंत 14 करोड़ 50 लाख साल पहले हुआ था. जुरासिक युग को भी 3 भागों में बाटा गया.
· अर्ली जुरासिक
· मिडिल जुरासिक
· लेट जुरासिक
अर्ली जुरासिक की अवधि पिछले 20 करोड़ 10 लाख साल पहले से 17 करोड़ 40 लाख साल तक थी. इस समय में कई नए समुद्री जीव आ गये थे. और जमीन पर डायनासौर्स, मगरमच्छ और कई दुसरे बड़े जीवों का कब्ज़ा था. जिसमे डिलोफोसौरस(dilophosaurus) सबसे आगे थे. मगरमच्छो का भी विकास जारी था. अब दुनिया के पहले मैमेल्स भी आ गये थे. जो आकार में छोटे चूहे जैसे दिखते थे.
मिडिल जुरासिक की समय अवधि पिछले 17 करोड़ 40 लाख साल से 16 करोड़ 30 लाख साल तक रहा. जिस वक्त डायनासौर्स की 1 हजार से भी ज्यादा प्रजातियाँ पृथ्वी पर आ चुकी थी. इसीवक्त विशाल डायनासौर ब्रचिओसौरस (Brachiosaurus) और डिप्लोडोकस (Diplodocus) दिखते थे जिनके सर पर सींग भी होती थी. दुसरे प्रजाति के बड़े डायनासोर्स अल्लोसौरस (allosaurus) भी आम तौर पर पाए जाते थे. कोनिफर नाम के जंगलों ने दुनिया को हरा भरा कर दिया था. वन्ही समुद्रों में भी प्लेसिओसौरस (plesiosaurs) और इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) नाम के जीवों का राज हो गया था.
लेट जुरासिक का समय पिछले 16 करोड़ 30 लाख साल से 14 करोड़ 50 लाख साल तक रहा था. इस समय में पेंजिया महाद्वीप टूट कर कई भागों में बट रहा था. इसका असर समुद्री जीवो पर पड़ा, जिससे इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) और प्लेसिओसौरस (plesiosaurs) ये बदलाव झेल नहीं पाए. और इनका अस्तित्व खत्म हो गया. उस वक्त के अधिकतर डायनासौर खत्म हो गये थे. पेंजिया के टूटने की वजह से नए तरह का महासागर बना. जिसे आज हम एटलांटिक महासागर कहते हैं.
अब शुरुवात हुयी क्रिटेसिअस युग की

डायनासोर का अंत समय , क्रिटेसिअस युग की शुरुवात

समय के साथ ही नए डायनासौर अस्तित्व में आये. अब क्रिटेसिअस युग की शुरुवात हुयी, जिसकी अवधि पिछले 14 करोड़ 50 लाख साल से 6 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा था. क्रिटेसिअस युग मेजोजोइक युग का सबसे लम्बा युग था. इस युग को दो भागों में बाटा गया है.
· अर्ली क्रिटेसिअस युग
· लेट क्रिटेसिअस युग
अर्ली क्रिटेसिअस युग पिछले 14 करोड़ 50 लाख सालों से पिछले 10 करोड़ सालों तक रहा था. इस समय में कई तरह की प्रजातियों के डायनासौर पृथ्वी पर आये. जैसे कार्चारोदोंतोसौरस(Carcharodontosaurus), स्पाईनोसौरस (Spinosaurus) और समुद्रों में भी मोसासौरस (mosasaurs) पाए जाते थे. ये जीव जो आकार में डायनासौर जितने या उससे भी बड़े होते थे, सभी जीव अंडे देकर अपनी प्रजातियों को आगे बढ़ा रहे थे. आसमान में उड़ने वाले जीव जैसे टेपजारा(Tapejara) और ओर्निथोचीरस (Ornithocheirus) भी आकार में बड़े होने लगे थे. मौसम सभी जीवों के अनुकूल चल रहा था.
शुरुवात हुयी अब लेट क्रिटेसिअस युग की
जो लगभग पिछले 10 करोड़ साल से 6 करोड़ 60 लाख सालों तक रहा था. उस वक्त पृथ्वी का तापमान लगभग 20 डिग्री
सेल्सियस था. इस वक्त भी डायनासौर अपना विकास कर के अलग अलग प्रजातियों के रूप में जन्म ले रहे थे. जैसे हड्रोसौरस (Hadrosaurs), अन्किलोसौरस (Ankylosaurus), ट्राईसेरोटोप्स (Triceratops) और त्य्रांनोसौरस (Tyrannosaurus). ये ऐसे जीव थे. जो दुसरे जीवों को मारकर अपना भोजन बनाते थे. दूसरी तरफ एपेटोसौर्स, ब्रेकियोसौर्स ऐसे डायनासौर थे जो शाकाहारी थे. ये पेड़ पौधे ही खाते थे. गहरे समुद्र के अन्दर मोसासौरस (mosasaurs) ने इच्थ्योसौरस (ichthyosaurs) को मारकर उनकी जगह ले ली थी. और एल्स्मोसौरस (Elsmosaurus) जिनकी गर्दन जिराफ के जितनी लम्बी होती थी. वो भी समुद्रों में पाए जाने लगे थे. अब धरती पर फूलों वाले पेड़ भी उगने लगे थे. अब क्रिटेसिअस युग का अंत होने का समय आ गया था. धरती की सतह खिसकने लगी थी. और पेंजिया टूटकर अलग अलग महाद्वीपों में बटने लगे थे. जिससे ज्वालामुखी फटना शुरू हो गया था. और लावा के अन्दर मौजूद जहरीली गैसें सभी जीवों के अंत का कारण बन गयीं. ये सब हो ही रहा था. तभी आज से पिछले लगभग 6 करोड़ 60 लाख साल पहले आसमान से 1 (Astroid) गृह जो 70 हजार kmph की रफ़्तार से, पृथ्वी के मैक्सिको देश के पेनेन्सुला सिटी में जा गिरा. जिससे पृथ्वी पर से 75% आबादी का अंत हो गया. सभी डायनासौर का अस्तित्व इस क्रिटेसिअस युग के साथ खत्म हो गया था. बचे हुए 25 % डायनासोर और दुसरे जीव भूंख मिटाने के लिए एक दुसरे को मारकर खाने लगे जिससे . 1-1 करके सारे डायनासोरों का अस्तित्व खत्म हो गया.

क्या डायनासोर का अस्तित्व आज भी है ? तो इसका जवाब हाँ है.



डायनासोर का हिन्दी शब्द भीमसरट होता है. जिसका अर्थ भयानक छिपकली है. कुछ डायनासोर शाकाहारी पेड़ पौधे खाने वाले थे. तो कुछ मांसाहारी थे. कुछ डायनासोर 2 पैरों वाले थे. तो कुछ 4 पैरों वाले थे. डायनासोर अपने अंडे देने के लिए घोंसलों का निर्माण करते थे. और आज पक्षियों के समान अंडे देते थे. आज के पक्षियों को डायनासोर का ही वंशज माना जाता है. वैज्ञानिकों ने अब तक डायनासौर के 500 वंश और 1000 प्रजातियों की खोज की है.  आसमान में उड़ने वाली चिड़ियाँ, और दीवाल पर चलने वाली छिपकलियाँ , डायनासोर की 1000 प्रजातियों में से, बचे हुये कुछ वंशज ही हैं. जिन्हें हम और आप बड़ी आसानी से देख पाते हैं. अब वो भयंकर नहीं रहे, क्योंकि अब उनका आकार बेहद छोटा है.   जिनके अवशेष पृथ्वी के हर महाद्वीपों में पाए गए है. साल 1970 में मिले डायनासोर के कंकाल दुनिया भर के संग्राहलयों में आकर्षण का केंद्र बन गये है.